फटी एड़ियों का इलाज: सही क्रीम, कारण और सर्दियों में बचाव

सर्दियों में बहुत से लोगों को फटी एड़ियों की समस्या हो जाती है। शुरुआत में एड़ियाँ सिर्फ सूखी और खुरदरी लगती हैं, लेकिन धीरे-धीरे उनमें दरारें पड़ने लगती हैं, चलने में दर्द होता है और कई बार खून भी आने लगता है।
ज़्यादातर लोग इसे मामूली समझकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं या सिर्फ तेल लगा लेते हैं, लेकिन जब समस्या बढ़ जाती है तब सही इलाज ढूंढना पड़ता है। खासकर सर्दियों में यह समस्या ज़्यादा बढ़ जाती है, क्योंकि ठंडी हवा त्वचा की नमी को जल्दी खत्म कर देती है।
इस लेख में हम आसान भाषा में समझेंगे कि एड़ियाँ क्यों फटती हैं, कौन-सी क्रीम सच में असरदार होती है, और सर्दियों में दोबारा एड़ियाँ फटने से कैसे बचा जा सकता है, ताकि आप सही और सुरक्षित इलाज चुन सकें।
Table of Contents
फटी एड़ियाँ क्या होती हैं?
फटी एड़ियाँ तब होती हैं जब पैरों की त्वचा बहुत ज़्यादा सूखी, मोटी और सख्त हो जाती है। एड़ी पर शरीर का पूरा वजन पड़ता है, इसलिए जब त्वचा में नमी कम हो जाती है तो वह फैल नहीं पाती और उस पर दबाव पड़ने से दरारें (cracks) पड़ने लगती हैं।
शुरुआत में ये दरारें हल्की होती हैं, लेकिन अगर त्वचा की देखभाल न की जाए तो ये गहरी हो सकती हैं। गहरी दरारों में चलने पर दर्द होता है और कभी-कभी खून भी निकल आता है। ऐसी स्थिति में एड़ी में इन्फेक्शन का खतरा भी बढ़ जाता है।
आसान शब्दों में कहें तो:
- पहले त्वचा सूखती है
- फिर मोटी और सख्त होती है
- और आखिर में दबाव के कारण फट जाती है
इसीलिए फटी एड़ियों का सही इलाज सिर्फ ऊपर-ऊपर नहीं, बल्कि त्वचा की नमी और सुरक्षा दोनों को ध्यान में रखकर करना ज़रूरी होता है।
ठंडी में एड़ी क्यों फटती है?
सर्दियों में एड़ियाँ फटने की सबसे अहम वजह होती है त्वचा का ज़रूरत से ज़्यादा सूख जाना, जिसे medical language में Xerosis कहा जाता है। ठंडी हवा में नमी कम होती है, जिससे त्वचा अपनी प्राकृतिक नमी जल्दी खो देती है। जब यह नमी लगातार कम होती रहती है, तो त्वचा की ऊपर वाली सुरक्षा परत यानी skin barrier कमजोर होने लगती है।
हमारी त्वचा में कुछ प्राकृतिक तत्व होते हैं, जिन्हें Natural Moisturizing Factors (NMF) कहा जाता है। ये तत्व त्वचा में पानी को पकड़कर रखते हैं और उसे नरम बनाए रखते हैं। सर्दियों में बार-बार गरम पानी से नहाने, ज़्यादा साबुन इस्तेमाल करने और नियमित मॉइस्चराइज़ न करने से ये NMF कम हो जाते हैं। जब ऐसा होता है, तो एड़ी की त्वचा रूखी, मोटी और सख्त हो जाती है।
एड़ी पर शरीर का पूरा वजन पड़ता है। सर्दियों में जब सूखी और सख्त त्वचा पर चलने-फिरने या लंबे समय तक खड़े रहने का दबाव पड़ता है, तो त्वचा फैल नहीं पाती और उसमें दरारें पड़ने लगती हैं। अगर जूते या चप्पल खुले हों, तो रगड़ और दबाव और भी बढ़ जाता है, जिससे समस्या जल्दी गंभीर हो सकती है।
उम्र बढ़ने के साथ त्वचा में तेल बनाने की क्षमता भी कम हो जाती है। इसलिए बुज़ुर्गों में सर्दियों के मौसम में एड़ियाँ ज़्यादा जल्दी फटती हैं। इसी तरह जिन लोगों को दिनभर खड़े रहना पड़ता है या जो पैरों की देखभाल को नजरअंदाज़ करते हैं, उनमें यह समस्या और बढ़ जाती है।
एड़ी फटने का कारण और जोखिम बढ़ाने वाले कारण
एड़ी फटने की समस्या सिर्फ सर्दियों की हवा से ही नहीं होती, बल्कि हमारी रोज़मर्रा की कुछ आदतें भी इसे बढ़ाने में बड़ा रोल निभाती हैं। सबसे आम कारण है
नंगे पैर चलना या पतली चप्पल पहनना। जब हम बिना जूते या बिना cushioned footwear के चलते हैं, तो एड़ी पर सीधा दबाव पड़ता है। सूखी त्वचा इस दबाव को सहन नहीं कर पाती और धीरे-धीरे उसमें दरारें बनने लगती हैं।
ओपन हील फुटवियर, जैसे पीछे से खुले सैंडल या स्लिपर, एड़ी को ठीक से सपोर्ट नहीं देते। ऐसे जूते पहनने से एड़ी की त्वचा बार-बार बाहर की तरफ फैलती है, जिससे त्वचा पर खिंचाव और रगड़ (friction) बढ़ जाती है। यही वजह है कि खुले जूते पहनने वालों में फटी एड़ियों की समस्या ज़्यादा देखने को मिलती है।
शरीर का वजन ज़्यादा होना (मोटापा) भी एक अहम जोखिम कारक है। ज़्यादा वजन होने पर एड़ी पर पड़ने वाला दबाव बढ़ जाता है, जिससे सूखी और मोटी त्वचा जल्दी फट जाती है।
उम्र बढ़ने के साथ त्वचा में नेचुरल तेल बनने की मात्रा कम होने लगती है। इससे त्वचा रूखी, पतली और कम लचीली हो जाती है। बुज़ुर्गों में यही कारण है कि एड़ियाँ जल्दी फटती हैं और उन्हें ठीक होने में भी ज़्यादा समय लगता है।
कुछ लोगों में फटी एड़ियों की समस्या सिर्फ मौसम या जूतों की वजह से नहीं, बल्कि डायबिटीज़, थायरॉइड या दूसरी त्वचा संबंधी बीमारियों से भी जुड़ी हो सकती है। जैसे:-
Diabetes
- त्वचा ज़्यादा सूखी हो जाती है
- पैरों में blood circulation कमजोर हो सकता है
- घाव भरने की क्षमता (healing) कम हो जाती है
इस वजह से एड़ी की हल्की दरार भी गहरी fissure में बदल सकती है और infection का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए डायबिटीज़ के मरीजों में फटी एड़ियों को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए।
Hypothyroidism (थायरॉइड की कमी)
इस condition में:
- त्वचा बहुत ज़्यादा सूखी और खुरदरी हो जाती है
- sweating कम हो जाती है
- heels, elbows जैसी जगहों पर cracks जल्दी पड़ते हैं
कई बार patient को पता भी नहीं होता कि thyroid issue है।
Psoriasis
यह एक chronic skin condition है जिसमें:
- त्वचा मोटी और पपड़ीदार हो जाती है
- एड़ी पर गहरी दरारें बन सकती हैं
- cream से राहत मिलती है लेकिन long-term care ज़रूरी होती है
Eczema / Atopic Dermatitis
अगर व्यक्ति को पहले से eczema है, तो:
- heels पर cracks पड़ने का risk बढ़ जाता है
- त्वचा का barrier कमजोर रहता है
- dryness और itching ज़्यादा होती है
Vitamin deficiency (A, E, B-complex)
कुछ vitamins की कमी से:
- त्वचा की repair process धीमी हो जाती है
- dryness और roughness बढ़ती है
- एड़ी जल्दी फट सकती है
फटी एड़ियों का इलाज: Cream क्यों ज़रूरी है?
ज़्यादातर लोग जब एड़ियाँ फटने लगती हैं, तो सबसे पहले तेल या घरेलू उपाय लगाना शुरू कर देते हैं। शुरुआत में इससे थोड़ी softness महसूस हो सकती है, लेकिन गहरी दरारों में सिर्फ तेल लगाने से समस्या पूरी तरह ठीक नहीं होती। इसका कारण है कि तेल और मेडिकल क्रीम दोनों का काम अलग-अलग होता है।
तेल, जैसे नारियल तेल या सरसों का तेल, त्वचा की ऊपरी सतह को चिकना बना देता है। लेकिन जब एड़ी की त्वचा बहुत ज़्यादा सूखी, मोटी और सख्त हो चुकी होती है, तब सिर्फ तेल उस गहराई तक नहीं पहुंच पाता जहाँ असली damage हुआ है। यही वजह है कि तेल लगाने के बाद भी दरारें बनी रहती हैं और कुछ दिनों में समस्या फिर से लौट आती है।
मेडिकल क्रीम खास तौर पर इस तरह बनाई जाती हैं कि वे सिर्फ नमी ही नहीं देतीं, बल्कि त्वचा की मरम्मत (repair) भी करती हैं। फटी एड़ियों में अक्सर त्वचा की protective layer यानी skin barrier कमजोर हो जाती है। सही क्रीम इस barrier को दोबारा मजबूत करने में मदद करती है, जिससे त्वचा फिर से नमी को पकड़ पाती है और आगे फटने से बचती है।
इसके अलावा, फटी एड़ियों में एक और बड़ी समस्या होती है — dead और hard skin की परत। सिर्फ तेल इस मोटी परत को हटाने या नरम करने में ज़्यादा असरदार नहीं होता। जबकि सही क्रीम में ऐसे ingredients होते हैं जो धीरे-धीरे इस सख्त त्वचा को नरम करते हैं, जिससे नई और स्वस्थ त्वचा बाहर आ पाती है। इसे ही मेडिकल भाषा में gentle exfoliation कहा जाता है।
आसान शब्दों में कहें तो, फटी एड़ियों के इलाज में क्रीम इसलिए ज़रूरी है क्योंकि:
- यह त्वचा को गहराई से hydrate करती है
- कमजोर skin barrier को repair करती है
- मोटी और सख्त त्वचा को धीरे-धीरे नरम करती है
इसी वजह से अगर एड़ियों में दरारें पड़ चुकी हैं, दर्द होता है या चलने में परेशानी है, तो सिर्फ तेल पर भरोसा करने की बजाय सही तरह की heel repair cream इस्तेमाल करना ज़्यादा असरदार और सुरक्षित इलाज माना जाता है।
फटी एड़ियों की क्रीम में क्या होना चाहिए? (Evidence-Based)
फटी एड़ियों के लिए हर क्रीम एक जैसी काम नहीं करती। असरदार क्रीम वही मानी जाती है, जो सिर्फ ऊपर से चिकनाहट न दे, बल्कि त्वचा की गहराई तक जाकर नमी, मरम्मत और सख्त त्वचा की समस्या—तीनों पर एक साथ काम करे। इसी वजह से dermatology research में कुछ खास ingredients को फटी एड़ियों के इलाज के लिए ज़्यादा प्रभावी माना गया है।
सबसे अहम ingredient है Urea
Urea का काम सिर्फ त्वचा को moisturize करना नहीं होता, बल्कि यह त्वचा में पानी को खींचकर रोकने में मदद करता है, इसलिए इसे humectant कहा जाता है।
हल्के मामलों में low-percentage urea त्वचा को नरम बनाता है, जबकि ज़्यादा फटी और सख्त एड़ियों में high-percentage urea मोटी और hard skin को धीरे-धीरे पतला करने में मदद करता है। इसी वजह से urea वाली क्रीम को cracked heels के इलाज में काफी असरदार माना जाता है।
इसके बाद आते हैं Lactic Acid या Glycolic Acid जैसे ingredients
फटी एड़ियों में अक्सर समस्या यह होती है कि एड़ी पर dead skin की मोटी परत जम जाती है। ये acids उस सख्त और मृत त्वचा को ढीला करने में मदद करते हैं, जिससे वह धीरे-धीरे निकलने लगती है और नीचे की नई त्वचा को ठीक होने का मौका मिलता है।
सही मात्रा में इस्तेमाल किए जाने पर ये acids त्वचा को नुकसान पहुँचाए बिना gentle exfoliation का काम करते हैं।
तीसरा ज़रूरी हिस्सा होता है Glycerin और Petrolatum
Glycerin त्वचा में नमी को खींचकर बनाए रखता है, जबकि Petrolatum त्वचा के ऊपर एक protective layer बनाकर उस नमी को बाहर जाने से रोकता है।
फटी एड़ियों में skin barrier कमजोर हो जाता है, और ये दोनों ingredients मिलकर उस barrier को दोबारा मजबूत करने में मदद करते हैं। इसी वजह से सिर्फ exfoliation ही नहीं, बल्कि barrier repair भी इलाज का अहम हिस्सा होता है।
असल में सबसे अच्छे नतीजे तब मिलते हैं, जब क्रीम में ये सभी तत्व सही combination में मौजूद हों। यानी एक तरफ urea और acids सख्त त्वचा को नरम करें, और दूसरी तरफ glycerin व petrolatum त्वचा की नमी और सुरक्षा बनाए रखें। इसी को dermatology में combination therapy कहा जाता है, और यही approach फटी एड़ियों के लंबे समय तक असरदार इलाज में मदद करती है।
Market में मिलने वाली creams: किस level की फटी एड़ियों में क्या सही रहता है?
फटी एड़ियों का इलाज चुनते समय यह समझना बहुत ज़रूरी होता है कि आपकी समस्या हल्की, मध्यम या गंभीर किस level की है। हर cream हर तरह की फटी एड़ियों पर एक जैसा असर नहीं करती, इसलिए सही category की cream चुनना इलाज को ज़्यादा असरदार बनाता है।
अगर एड़ियाँ हल्की सूखी हैं और सिर्फ ऊपर से rough महसूस होती हैं, बिना गहरी दरार या दर्द के,
तो ऐसे मामलों में simple antiseptic या moisturizing creams काफी हो सकती हैं। इस category में आने वाली creams त्वचा को नरम बनाने और हल्की dryness को ठीक करने में मदद करती हैं। हल्की फटी एड़ियों में कई लोग Boroline जैसी creams से भी आराम महसूस करते हैं, खासकर अगर रोज़ाना रात में सही तरीके से लगाई जाए।
जब एड़ियों में दरारें दिखने लगें, त्वचा मोटी हो जाए और चलने पर हल्का दर्द महसूस हो, तो इसे moderate level माना जाता है।
इस स्थिति में ऐसी creams ज़्यादा फायदेमंद होती हैं, जिनमें urea और glycerin जैसे ingredients मौजूद हों। Urea सख्त त्वचा को नरम करता है, जबकि glycerin त्वचा में नमी बनाए रखने में मदद करता है। इस combination से दरारें धीरे-धीरे भरने लगती हैं और त्वचा दोबारा फटने से बचती है।
अगर एड़ियों में गहरी दरारें, दर्द या कभी-कभी खून आने की समस्या हो, तो यह severe cracked heels का संकेत हो सकता है।
ऐसे मामलों में साधारण moisturizing creams पर्याप्त नहीं होतीं। यहाँ ज़्यादा असरदार वही creams होती हैं, जिनमें urea के साथ lactic acid या glycolic acid जैसे AHA ingredients शामिल हों। ये creams मोटी और सख्त त्वचा को धीरे-धीरे हटाकर नई त्वचा के ठीक होने में मदद करती हैं। हालांकि ऐसी creams का इस्तेमाल हमेशा सही तरीके और सीमित मात्रा में करना ज़रूरी होता है।
कुल मिलाकर, फटी एड़ियों के इलाज में सबसे अच्छा तरीका यही है कि problem के level के हिसाब से cream चुनी जाए, न कि सिर्फ नाम देखकर। अगर आप चाहें, तो नीचे दी गई trusted creams को ingredients के आधार पर देखकर अपने लिए सही विकल्प चुन सकती हैं।
Mild Level (हल्की सूखी त्वचा / शुरुआती cracks)
ये creams रोज़मर्रा की सूखी त्वचा और हल्की फटी एड़ियों में आराम देती हैं, और moisturizer के रूप में काम करती हैं:
Boroline Antiseptic Cream यहाँ देखें
- Classic desi cream
- Antiseptic + moisturizing effect
- हल्की dryness में अच्छा काम करती है Light barrier provide करता है, everyday use friendly.
Vaseline Intensive Care Advanced Repair Lotion / Jelly यहाँ देखें
- Petrolatum + moisture lock formula
- Dry skin को protect करता है Mild/early cracked heels में soothing option.
Nivea Creme (Blue Tin) यहाँ देखें
- Deep moisturizing
- काफी लोगों को पसंद आता है Mild dryness/heavy winter skin में basic hydration good.
Moderate Level (Urea + Glycerin, Dryness + cracks)
इन creams में urea + glycerin होते हैं जो dryness को गहराई से remove करने में मदद करते हैं:
Cotaryl / Urea 10% Cream यहाँ देखें
- 10% urea moisturizer
- गहरी dryness में बहुत अच्छा, Glycerin के साथ skin hydration boost.
Xerina (Urea-based) यहाँ देखें
- Urea + glycerin combination
- Dry & scaly skin पर असरदार
- Moderate cracked heels के लिए popular choice.
Ureaderm Cream यहाँ देखें
- Urea formulation
- Dry, thick skin को soften करने में मदद
- Regular night routine में effective.
Severe Level (Urea + AHA / Keratolytic Combo)
इन products में higher % urea और AHA (lactic/glycolic acid) जैसे ingredients होते हैं, जो tough, scaly skin और deep cracks को target करते हैं:
Flexitol Heel Balm यहाँ देखें
- Urea + lactic acid formulation
- बहुत लोकप्रिय foot repair cream
- Deep fissures और rough heels में असरदार.
Kerasal Intensive Foot Repair यहाँ देखें
- Urea + salicylic acid + lipids
- Dead skin remove + moisture lock
- Severe cracked heels में fast relief के लिए अच्छी.
AmLactin Foot Repair Cream यहाँ देखें
- Lactic acid + moisturizing base
- Gently exfoliates + hydrates
- Thick, rough winter skin में help.
क्रीम लगाने का सही तरीका
फटी एड़ियों में क्रीम तभी सही तरह काम करती है, जब उसे सही तरीके और सही समय पर लगाया जाए। सिर्फ दिन में ऊपर-ऊपर क्रीम लगाने से गहरी दरारें जल्दी ठीक नहीं होतीं। इसलिए dermatology experts रात का routine सबसे असरदार मानते हैं।
Step 1:
सबसे पहले पैरों को गुनगुने पानी में 10–15 मिनट तक भिगोना चाहिए। इससे एड़ी की सख्त और सूखी त्वचा नरम होने लगती है और क्रीम के ingredients अंदर तक बेहतर तरीके से काम कर पाते हैं। बहुत ज़्यादा गरम पानी से बचना चाहिए, क्योंकि इससे त्वचा और ज़्यादा सूख सकती है।
Step 2:
इसके बाद पैरों को तौलिये से हल्के हाथ से सुखाना ज़रूरी होता है। रगड़कर या जोर से पोंछने से एड़ी की दरारें और गहरी हो सकती हैं। ध्यान रखें कि त्वचा हल्की नम रहे, पूरी तरह सूखी नहीं।
Step 3:
अब चुनी हुई heel repair cream की मोटी लेकिन समान परत एड़ी पर लगाएँ। क्रीम को धीरे-धीरे circular motion में फैलाएँ, ताकि वह cracks के अंदर तक पहुँच सके। बहुत ज़्यादा क्रीम लगाने से फायदा नहीं बढ़ता, लेकिन कम लगाने से असर कम हो सकता है।
Step 4:
क्रीम लगाने के बाद cotton socks पहनना बहुत जरूरी स्टेप है। इससे क्रीम रात भर एड़ी पर बनी रहती है, नमी लॉक होती है और त्वचा को repair होने का पूरा समय मिलता है। बिना मोज़े के सोने पर क्रीम जल्दी हट जाती है और असर कम हो जाता है।
“एक ही रात में फटी एड़ियों से छुटकारा पाएं” वाली सच्चाई
कई लोग सोचते हैं कि एक ही रात में फटी एड़ियाँ पूरी तरह ठीक हो जाएँगी, लेकिन यह हमेशा संभव नहीं होता। पहली रात में आपको softness और हल्का आराम ज़रूर महसूस हो सकता है, लेकिन गहरी दरारों को भरने में कुछ दिन का regular routine ज़रूरी होता है।
लगातार 5–7 रात सही तरीके से क्रीम लगाने पर अच्छे और टिकाऊ नतीजे मिलने लगते हैं। इसलिए फटी एड़ियों के इलाज में सबसे ज़्यादा जरूरी है regular care और सही तरीका, न कि जल्दबाज़ी।
फटी एड़ियाँ कितने दिन में ठीक होती हैं?
फटी एड़ियों के ठीक होने में कितना समय लगेगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि समस्या कितनी हल्की या गंभीर है और आप क्रीम को कितनी नियमितता से सही तरीके से लगा रहे हैं। कई लोग 1–2 दिन में पूरा आराम चाहने लगते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि त्वचा को repair होने में थोड़ा समय लगता है।
अगर एड़ियाँ सिर्फ हल्की सूखी या थोड़ी खुरदरी हैं और दरारें बहुत गहरी नहीं हैं, तो सही moisturizing या urea-based क्रीम को रोज़ रात लगाने से 5 से 7 दिनों में अच्छा सुधार दिखने लगता है। इस दौरान एड़ियाँ नरम महसूस होने लगती हैं और चलने में होने वाली असहजता कम हो जाती है।
जिन लोगों की एड़ियों में गहरी दरारें, दर्द या कभी-कभी खून आने की समस्या होती है, उनके लिए इलाज में ज़्यादा समय लग सकता है। ऐसे मामलों में नियमित night routine के साथ सही heel repair cream लगाने पर 10 से 14 दिन में दरारें धीरे-धीरे भरने लगती हैं। यहाँ सबसे ज़रूरी बात है कि बीच में इलाज न छोड़ा जाए, भले ही शुरुआत में आराम महसूस होने लगे।
अगर व्यक्ति को डायबिटीज़ या कोई दूसरी clinical condition है, तो एड़ियों के ठीक होने में और ज़्यादा समय लग सकता है। ऐसे मामलों में त्वचा की healing क्षमता कम होती है, इसलिए कभी-कभी डॉक्टर की सलाह और extra care की ज़रूरत पड़ती है।
आसान शब्दों में कहें तो फटी एड़ियों का इलाज कोई instant process नहीं है। सही क्रीम + सही तरीका + नियमित देखभाल से ही स्थायी और सुरक्षित आराम मिलता है। जल्दी ठीक होने के चक्कर में गलत तरीके अपनाने से समस्या और बढ़ भी सकती है।
डायबिटीज़ वालों के लिए खास सावधानी (Important Medical Warning)
अगर किसी व्यक्ति को डायबिटीज़ है और उसकी एड़ियाँ फट रही हैं, तो इस समस्या को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। डायबिटीज़ में पैरों की त्वचा आम लोगों की तुलना में ज़्यादा संवेदनशील होती है और उसमें घाव भरने की क्षमता (healing) भी कम हो जाती है। इसी वजह से एड़ी की छोटी सी दरार भी धीरे-धीरे गहरी fissure, इंफेक्शन या अल्सर का रूप ले सकती है।
डायबिटीज़ के मरीजों में कई बार पैरों की नसों की संवेदना कम हो जाती है, जिससे दर्द या चोट का एहसास देर से होता है। ऐसे में अगर एड़ी फटकर खून आने लगे और समय पर ध्यान न दिया जाए, तो इंफेक्शन का खतरा बढ़ सकता है। यही कारण है कि डॉक्टर डायबिटिक फुट के मामलों में extra caution की सलाह देते हैं।
डायबिटीज़ होने पर फटी एड़ियों के इलाज में कुछ बातों से खासतौर पर बचना चाहिए। ब्लेड, रेज़र या बहुत सख्त फुट स्क्रबर से dead skin हटाने की कोशिश करना नुकसानदायक हो सकता है। इसी तरह बिना सलाह के बहुत strong acid या harsh creams का इस्तेमाल भी सुरक्षित नहीं माना जाता।
ऐसे मरीजों के लिए सबसे बेहतर तरीका यह होता है कि वे:
- पैरों की रोज़ाना जांच करें
- किसी भी गहरी दरार, सूजन या पस को नज़रअंदाज़ न करें
- जरूरत पड़ने पर डॉक्टर या त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लें
अगर एड़ियों में खून आ रहा हो, दर्द बढ़ता जा रहा हो या 1–2 हफ्ते में सुधार न दिखे, तो self-treatment पर भरोसा करने की बजाय medical advice लेना ज़रूरी हो जाता है।
यह सावधानी वाला हिस्सा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सही समय पर ध्यान देने से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है, खासकर डायबिटीज़ के मामलों में।
एड़ी फटने का घरेलू उपाय: कब मदद करते हैं और कब नहीं
कब घरेलू उपाय मदद करते हैं?
- अगर एड़ियाँ हल्की सूखी या खुरदरी हैं और गहरी दरारें नहीं हैं
- सर्दियों की शुरुआत में जब सिर्फ dryness महसूस हो
- जब आप क्रीम के साथ supportive care चाहते हैं
ऐसे मामलों में नारियल तेल, सरसों का तेल या पेट्रोलियम जेली जैसी चीज़ें त्वचा को नरम रखने में मदद कर सकती हैं।
कब घरेलू उपाय काफी नहीं होते?
- जब एड़ियों में गहरी दरारें, दर्द या खून आने लगे
- जब त्वचा बहुत मोटी और सख्त हो जाए
- जब चलने में परेशानी हो या समस्या बार-बार लौट आए
इन स्थितियों में सिर्फ घरेलू उपाय लगाने से इलाज पूरा नहीं होता और सही heel repair cream ज़रूरी हो जाती है।
क्रीम के साथ घरेलू उपाय कैसे combine करें?
- रात में medical cream लगाने के बाद cotton socks पहनें
- दिन में dryness से बचाने के लिए हल्का तेल या moisturizer लगा सकते हैं
- बहुत ज़्यादा रगड़ या scrubbing से बचें
इस तरह घरेलू उपाय क्रीम के असर को बढ़ाते हैं, replace नहीं करते।
Bottom line
घरेलू उपाय सहायक (supportive) हो सकते हैं, लेकिन इलाज का main हिस्सा नहीं। सही क्रीम + सही तरीका ही फटी एड़ियों में टिकाऊ राहत देता है।
Future Prevention: सर्दियों में दोबारा एड़ी फटने से बचाव
- रोज़ाना मॉइस्चराइज़ करने की आदत डालें
नहाने के बाद और रात को सोने से पहले एड़ियों पर क्रीम या मॉइस्चराइज़र लगाना सर्दियों में बहुत ज़रूरी होता है। इससे त्वचा की नमी बनी रहती है और दोबारा दरार पड़ने का खतरा कम होता है। - Closed footwear पहनें
खुले सैंडल या चप्पल की बजाय ऐसे जूते पहनें जो एड़ी को सही सपोर्ट दें। इससे एड़ी पर दबाव और रगड़ कम होती है और त्वचा फैलकर फटने से बचती है। - पैरों की नियमित जांच करें
हफ्ते में कम से कम 2–3 बार एड़ियों को ध्यान से देखें। अगर त्वचा ज़्यादा सूखी, मोटी या फटती हुई दिखे, तो उसी समय care शुरू कर दें। डायबिटीज़ वाले लोगों के लिए यह आदत और भी ज़रूरी है। - पानी पीना न भूलें
सर्दियों में प्यास कम लगती है, लेकिन शरीर में पानी की कमी त्वचा को और सूखा बना देती है। दिन भर में पर्याप्त पानी पीने से त्वचा अंदर से hydrated रहती है।
Conclusion / Wrap-Up
फटी एड़ियों की समस्या आम है, खासकर सर्दियों में, लेकिन सही जानकारी और नियमित देखभाल से इसे आसानी से कंट्रोल किया जा सकता है।
समस्या के कारण समझकर, सही ingredients वाली क्रीम, सही night routine, और रोज़मर्रा की preventive care अपनाने से न सिर्फ एड़ियाँ ठीक होती हैं, बल्कि दोबारा फटने से भी बचाव होता है।
जल्दी असर पाने के चक्कर में गलत तरीके अपनाने से बेहतर है कि थोड़ा समय देकर सही इलाज किया जाए — यही सुरक्षित और लंबे समय तक असरदार तरीका है।
FAQs
फटी एड़ियों को हमेशा के लिए कैसे ठीक करें?
फटी एड़ियों को हमेशा के लिए ठीक करने के लिए एक बार का इलाज नहीं, बल्कि लगातार सही देखभाल ज़रूरी होती है। सबसे पहले एड़ी फटने का कारण समझना जरूरी है, जैसे ज़्यादा dryness, गलत footwear या सर्दियों में नमी की कमी। इसके बाद रोज़ रात को सही heel repair cream को सही तरीके से लगाना और cotton socks पहनना आदत बनानी चाहिए।
फटी एड़ी के लिए सबसे अच्छा इलाज क्या है?
फटी एड़ी का सबसे अच्छा इलाज है urea और glycerin वाली heel repair cream को रोज़ रात सही तरीके से लगाना और साथ में cotton socks पहनना। इससे त्वचा की नमी वापस आती है, दरारें भरती हैं और दोबारा फटने से बचाव होता है।
पैर फटने की वजह क्या है?
पैर फटने की सबसे आम वजह होती है त्वचा का ज़्यादा सूख जाना। सर्दियों में ठंडी हवा, कम नमी, बार-बार गरम पानी से नहाना, खुले जूते पहनना और पैरों पर नियमित क्रीम न लगाना त्वचा की नमी कम कर देते हैं। इसके अलावा ज़्यादा वजन, उम्र बढ़ना, डायबिटीज़ और कुछ त्वचा रोग भी पैर फटने की वजह बन सकते हैं।
किसकी कमी से एड़ियां फटती हैं?
एड़ियां फटने की सबसे आम वजह त्वचा में नमी की कमी होती है। इसके अलावा शरीर में Vitamin A, Vitamin E और B-complex की कमी से भी त्वचा ज़्यादा सूखी और खुरदरी हो सकती है, जिससे एड़ियां जल्दी फटती हैं। पानी कम पीना और सर्दियों में मॉइस्चराइज़र न लगाना भी इस समस्या को बढ़ा देता है।
क्या लिवर की समस्या से एड़ी फट सकती है?
सीधे तौर पर लिवर की समस्या एड़ी फटने का आम कारण नहीं होती, लेकिन कुछ मामलों में लिवर से जुड़ी बीमारियों में त्वचा बहुत ज़्यादा सूखी हो सकती है। ऐसी dryness की वजह से एड़ियाँ फटने का खतरा बढ़ सकता है। अगर एड़ी फटने के साथ लगातार खुजली, पीलापन या बहुत ज़्यादा dryness भी हो, तो डॉक्टर से जाँच कराना बेहतर रहता है।
क्या वैसलीन फटी एड़ी को ठीक कर सकती है?
वैसलीन हल्की सूखी या शुरुआती फटी एड़ियों में मदद कर सकती है, क्योंकि यह त्वचा की नमी को लॉक करती है। लेकिन अगर एड़ियों में गहरी दरारें, दर्द या खून आने लगे हों, तो सिर्फ वैसलीन से इलाज पूरा नहीं होता। ऐसे मामलों में heel repair cream ज़्यादा असरदार रहती है।
फटी एड़ियों के लिए सबसे अच्छी क्रीम कौन सी है?
फटी एड़ियों के लिए सबसे अच्छी क्रीम वह होती है जिसमें Urea, Glycerin या Lactic Acid जैसे ingredients हों। ये क्रीम त्वचा की नमी बढ़ाती हैं, सख्त त्वचा को नरम करती हैं और दरारें भरने में मदद करती हैं। हल्की फटी एड़ियों में simple moisturizing cream भी काम कर सकती है, लेकिन गहरी दरारों में heel repair cream ज़्यादा असरदार होती है।
References
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